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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 33
तदाप्रभूति वाग्ब्रह्म समग्रं पश्यतो मम। जागर्त्यर्थेन सहितं रसनाग्रमधिष्ठितम् ।।
तब से देखते हुए वह संपूर्ण वाग्ब्रह्म अर्थ के साथ मेरी जीभ पर स्थित होकर जाग रहा है।
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