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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 3
तत्र तीर्थविधिं कृत्वा दृष्ट्वा देवं महेश्वरम्। पुण्ये भागीरथीतीरे निषसाद स धर्मवित्।।
जिस वाराणसी में जाकर सभी व्यक्ति मुक्त हो जाते हैं, किंतु मुक्ति का मोक्ष नहीं होता है अर्थात! जहां मुक्ति सदा वास करती है और जहां पर स्वयं शंकर तारक रूप ब्रह्मा का उपदेश करते हैं,
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