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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 15
देवद्विजगवां गोप्ता बुर्दान्तयवनान्तकः । प्रपन्नानां परित्राता प्रजानां प्रियकारकः ।।
देव, ब्राह्मण तथा गायों का रक्षक, अदम्य यवनों के लिए साक्षात् यमराज, शरणागत की रक्षा करने वाला तथा जो प्रजाप्रिय है
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