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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 14
कृती कृतज्ञः सुकृती कृतात्मा कृतलक्षणः । वक्ता वाक्यस्य सत्यस्य श्रोता चातिविचक्षणः।।
कृतज्ञ, सुकार्य करने वाला, आत्मसंयमी और जो अपने सगुणों से सुविख्यात है, जो सत्यवक्ता एवं अत्यधिक चतुरता से सुनने वाला,
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