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शिवभारतम् • अध्याय 1 • श्लोक 10
ततः प्रमनसस्सर्वे तमूचुस्ते मनीषिणः। कर्तारं चारुकाव्यानामवतारं बृहस्पतेः ।।
तत्पश्चात प्रसन्न चित्त सभी पंडित सुंदर काव्य के कर्ता तथा बृहस्पति के अवतार उस परमानंद को बोले।
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