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शृंगार शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 96
शिखरिणी यदाऽऽसीदज्ञानं स्मरतिमिरसञ्चारजनितं तदा सर्वं नारीमयमिदमशेषं जगदभूत् ।
जब तक मुझमें काम का अज्ञान-अन्धकार था, तब तक मुझे सारा संसार स्त्रीमय दीखता था।
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