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शृंगार शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 92
अनुष्टुभ् अजितात्मसु सम्बद्धः समाधिकृतचापलः । भुजङ्गकुटिलः स्तब्धो भ्रूविक्षेपः खलायते ॥
अजितेन्द्रिय मनुष्यों से सम्बन्ध रखनेवाला, चित्त की एकाग्रता या समाधि में अतीव चञ्चलता करनेवाला, सर्प के समान कुटिल और स्तब्ध स्त्रियों का भ्रूक्षेप या कटाक्ष खल के समान आचरण करता है।
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