दोधककुङ्कुमपङ्ककलङ्कितदेहा गौरपयोधरकम्पितहारा।
नूपुरहंसरणत्पदपद्मा कं न वशीकुरुते भुवि रामा॥
जिसकी देह पर केसर लगी है, गोर गोर स्तनों पर हार झूल रहा है और नूपुर रुपी हंस जिसके चरणकमलों में मधुर मधुर शब्द कर रहे हैं – ऐसी सुन्दरी इस पृथ्वी पर किसके मन को वश में नहीं कर लेती?
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