वसन्ततिलकाधन्यास्त एव तरलायतलोचनानांतारुण्यदर्पघनपीनपयोधराणाम् ॥
क्षामोदरोपरिलसत्त्रिवलीलतानांदृष्ट्वाऽऽकृतिं विकृतिमेति मनो न येषाम् ॥
चञ्चल और बड़ी बड़ी आँखों वाली, यौवन के अभिमान से पूर्ण, दृढ़ और पुष्ट स्तनों वाली अवं क्षीण उदरभाग पर त्रिवली से सुशोभित युवती स्त्रियों की सूरत देखकर, जिन पुरुषों के मन में विकार उत्पन्न नहीं होता, वे पुरुष धन्य हैं।
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