अनुष्टुभ्वेश्याऽसौ मदनज्वाला रूपेन्धनविवर्धिता ।
कामिभिर्यत्र हूयन्ते यौवनानि धनानि च ॥
यह वैश्य सुंदरता रुपी इन्धन से जलती हुई प्रचंड कामाग्नि है। कामी पुरुष इस अग्नि में अपने यौवन और धन की आहुति देते हैं।
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