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शृंगार शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 77
वैतालीयमधु तिष्ठति वाचि योषितां हृदि हालाहलमेव केवलम् । अत एव निपीयतेऽधरो हृदयं मुष्टिभिरेव ताड्यते ॥
स्त्रियों की बातों में अमृत और ह्रदय में हलाहल विष होता है; इसीलिए पुरुष उनका अधरामृत पान और उनकी छातियों का मर्दन करते हैं।
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