रूप ही जल है, चञ्चल नयन मछलियां हैं, नाभि भंवर है और सर के बाल सर्प हैं – यह तरुण स्त्री रुपी नदी, दुस्तर नदी है। इस नदी में श्रृंगार-शास्त्र प्रवीण सज्जन स्नान करते हैं।
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