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शृंगार शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 71
स्रग्धराआवर्तः संशयानामविनयभवनं पत्तनं साहसानांदोषाणां संविधानं कपटशतमयं क्षेत्रमप्रत्ययानाम् ॥ स्वर्गद्वारस्य विघ्नौ नरकपुरमुखं सर्वमायाकरण्डंस्त्रीयन्त्रं केन सृष्टं विषममृतमयं प्राणिलोकस्य पाशः ॥
संदेहों का भंवर, अविनय का घर, साहसों का नगर, पाप दोषों का खजाना, सैकड़ों तरह के कपट और अविश्वास का क्षेत्र, स्वर्ग-द्वार का विघ्न, नरक नगर का द्वार, साड़ी मायाओं का पिटारा, अमृत रूप में विष और पुरुषों को मोह जाल में फ़साने वाला स्त्री-यंत्र न जाने किसने बनाया?
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