चन्द्रमा स्वरुप मुख, नेत्र ऐसे की कमल को भी शर्म आ जाये, शारीरिक कान्ति ऐसी जो सोने की दमक से को भी फीका कर दे, भौरों के पुञ्ज को जीतनेवाले केश, गजराज के गण्डस्थली की शोभा का अपमान करने वाले वक्ष, विशाल नितम्ब, मनोहर वाणी और कोमलता – ये सब स्त्रियों के स्वाभाविक भूषण हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शृंगार शतकम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शृंगार शतकम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।