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शृंगार शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 40
दोधकतरुणीवैषोहीपितकामा विकसितजातीपुष्पसुगन्धिः। उन्नतपीनपयोधरभारा प्रावृट् कुरुते कस्य न हर्षम्॥
कामदेव का उदय करनेवाली, प्रफुल्लित मालती की लता वाली, उत्तम सुगन्ध धारण करने वाली, उन्नत पीन पयोधरा वर्षा ऋतु, तरुणी स्त्री की तरह किसके मन में हर्ष उत्पन्न नहीं करती?
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