आम की, भौरों की, केसर की गहरी सुगन्ध से दशों दिशाएँ व्याप्त हो रही हैं, मधुर मकरन्द को पी पी कर भौंरे उन्मत्त हो रहे हैं – ऐसे ऋतुराज वसन्त में किसके मन में कामवासना उदय नहीं होता।
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