मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शृंगार शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 31
आर्याप्रियपुरतो युवतीनां तावत्पदमातनोति हृदि मानः । भवति न यावच्चन्दनतरुसुरभिर्निर्मलः पवनः ॥
मानिनी कामिनियों के हृदयों में अपने प्यारों के प्रति मान तभी तक ठहरता है जब तक चन्दन के वृक्षों की सुगन्धि से पूर्ण मलयाचल का वायु नहीं चलता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शृंगार शतकम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शृंगार शतकम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें