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शृंगार शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 28
अनुष्टुभ्एतत्कामफलं लोके यद्द्वयोरेकचित्तता । अन्यचित्तकृते कामे शवयोरेव सङ्गमः ॥
समागम के समय स्त्री पुरुष का एक हो जाना ही काम का फल है। यदि समागम में दोनों का चित्त एक न हो तो वह समागम नहीं; वह तो मृतकों का समागम है।
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