पुष्पिताग्राइदमनुचितमक्रमश्च पुंसांयदिह जरास्वपि मान्मथा विकाराः ।
यदपि च न कृतं नितम्बिनीनांस्तनपतनावधि जीवितं रतं वा ॥
विधाता ने दो बातें बड़ी अनुचित की हैं – १) पुरुषों में अत्यंत बुढ़ापा होने पर भी काम विकार का होना; २) स्त्रियों का कुच गिर जाने पर भी जीवित रहना और काम चेष्टा करना।
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