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शृंगार शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 26
आर्याआमीलितनयनानां यत्सुरतरसोऽनु संविदं भाति । मिथुनैर्मिथोऽवधारितमवितथमिदमेव कामनिर्वहणम् ॥
आलस्यपूर्ण नेत्रोंवाली स्त्रियों की काम से तृप्ति करना, स्त्री पुरुष दोनों का परस्पर काम्पूजन है, जिसको काम-क्रीड़ा करनेवाले दोनों स्त्री-पुरुष ही जानते हैं।
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