वसन्ततिलकासम्मोहयन्ति मदयन्ति विडम्बयन्तिनिर्भर्त्सयन्ति रमयन्ति विषादयन्ति ॥
एताः प्रविश्य सदयं हृदयं नराणांकिं नाम वामनयना न समाचरन्ति ॥
चतुर मृगनयनी स्त्रियां पुरुष के ह्रदय में एक बार दया से घुसकर उसे मोहित करतीं, मदोन्मत्त करतीं, तरसातीं, चिढ़ातीं, धमकातीं, रमण करतीं और विरह से दुख देती हैं। ऐसा काम है, जिसे ये मृगलोचनि नहीं करतीं।
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