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शृंगार शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 11
नूनमाज्ञाकरस्तस्याः सुभ्रुवो मकरध्वजः । यतस्तन्नेत्रसञ्चारसूचितेषु प्रवर्तते ॥
कामदेव निश्चय ही सुन्दर भौंहवाली स्त्रियों की आज्ञापालन करने वाला चाकर है; क्योंकि जिनपर उनके कटाक्ष पड़ते हैं, उन्ही को वह जा दबाता है।
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