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श्रीविद्यारत्नसूत्राणि • अध्याय 1 • श्लोक 47
खजकोणद्वयपत्रस्वरवसुपत्रयगधरणी महार्द्धायाः ॥
ख, ज कोण, द्वयपत्र, स्वर और वसु पत्रों सहित जो धरणि है, वह महार्द्धा का सदन है।
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