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श्रीविद्यारत्नसूत्राणि • अध्याय 1 • श्लोक 46
गगन वसुकोणद्वयपत्रस्वरधरणी तुर्यासदनम् ॥
गगन, वसु, द्विकोण, पत्र और स्वर सहित जो धरणि है, वह तुर्या का सदन है।
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