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श्रीविद्यारत्नसूत्राणि • अध्याय 1 • श्लोक 43
गगनप्रभाषड्वसुकोणपत्रस्य धरणी भुवनेशीसदनम् ॥
गगनप्रभा, षड्वसु, कोण और पत्रों सहित जो धरणि है, वह भुवनेशी का सदन है।
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