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श्रीविद्यारत्नसूत्राणि • अध्याय 1 • श्लोक 34
कगतजकोणहपत्रधरणिनागाः ॥
क, ग, त, ज आदि कोणों और ह पत्रों सहित धरणि नागों की है।
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