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श्रीविद्यारत्नसूत्राणि • अध्याय 1 • श्लोक 27
एतयोरावरणान्ताक्षरगणनं यलषहणदहपत्रधरणि द्वदशार्द्धासदनम् ॥
इन दोनों के आवरणों के अन्त के अक्षरों की गणना, य, ल, ष, ह, ण, द, ह आदि पत्रों सहित जो धरणि है, वह द्वादशार्ध सदन कहलाता है।
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