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श्रीविद्यारत्नसूत्राणि • अध्याय 1 • श्लोक 21
मणिगणनवावरणं तस्य ॥
उसके (श्रीसदन के) नौ आवरण मणियों के समूह के समान माने जाते हैं।
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