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श्रीविद्यारत्नसूत्राणि • अध्याय 1 • श्लोक 103
अथैतासां परिवाराणामनुपरिवारा असंङ्ख्याकाः ॥
इनके परिवारों के भी उपपरिवार असंख्य हैं।
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