मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
श्रीविद्यारत्नसूत्राणि • अध्याय 1 • श्लोक 101
अथ ह्रस्वाक्षरदीर्घपञ्चसमुचिता तथैव सङ्ख्या परा शाम्भवी ॥
परा शाम्भवी ह्रस्व अक्षरों और पाँच दीर्घों के समुच्चय से युक्त इसी संख्या से विशिष्ट है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्रीविद्यारत्नसूत्राणि के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

श्रीविद्यारत्नसूत्राणि के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें