आत्मलिंगार्चनं कुर्यादनालस्यं दिने दिने ।
तस्य स्यात्सकला सिद्धिर्नत्रकार्याविचारणा ।।
जो साधक नित्यप्रति आलस्यरहित होकर शरीरस्थ आत्मा की पूजा-अर्चना करता है उसे समस्त सिद्धियाँ अनायास ही मिल जाया करती हैं।
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