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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 91
मूलपद्यं यदा ध्यायेत् योगी स्वयम्भुलिङ्गकम् । तदातत्क्षणमात्रेण पापौघं नाशयेद् ध्रुवम् ।।
उक्त मूलाधार कमलवत् स्वयंभू लिंग का ध्यान जिस क्षण योगी करता है, उसी क्षण वह समस्त पापों से विमुक्त हो जाता है।
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