मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 90
जरामरणदुःखौघान्नाशयति गुरोर्वचः । इदं ध्यानं सदा कार्यं पवनाभ्यासिना परम् । ध्यानमात्रेण योगीन्द्रो मुच्यते सर्वकिल्बिषात् ।।
गुरु-वाक्य के द्वारा वृद्धता, मरणशीलता, क्लेशता तथा समस्त रोगों का शमन होता है। प्राणवायु के धारक अभ्यासी साधक को इस परमोच्च ध्यान में सदा ही सत्रद्ध रहना आवश्यक होता है। इसके ध्यानमात्र से ही श्रेष्ठ योगियों के सभी पातकों का क्षय हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें