वक्त्रे सरस्वती देवी सदा नृत्यति निर्भरम् ।
मन्त्रसिद्धिर्भवेत्तस्य जपादेव न संशयः ।।
ऐसे साधक के मुख-गहर में सदैव ही वाणी की अधिष्ठातृ देवी सरस्वती का वास रहा करता है अर्थात् उसे वाणी की सिद्धि उपलब्ध रहती है। उसे केवल मंत्रजाप से ही सिद्धि मिल जाया करती है।
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