मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 87
वपुषः कान्तिरुत्कृष्टा जठराग्निविवर्धनम् । आरोग्यं च पटुत्वं च सर्वज्ञत्वं च जायते ।।
इस मूलाधार चक्र की ध्यानपरावणता से शारीरिक सौन्दर्य में निखार आ जाता है तथा क्षुधाग्नि भी प्रज्वलित हो उठती है। इसके द्वारा रोगोत्पत्ति की सम्भावना नहीं रह जाती और साधक में कार्यक्षमता तथा सर्वज्ञता की उत्पत्ति होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें