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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 81
सूर्यकोटिप्रतीकाशं चन्द्रकोटिसुशीतलम् । एतत्त्रयं मिलित्वैव देवी त्रिपुरभैरवी । बीजसंज्ञं परं तेजस्तदेव परिकीर्तितम् ।।
कुंडलिनी, कामबीज और सुषुम्ना - इन तीनों का पारस्परिक मिलन होना ही देवी त्रिपुरभैरवी नामसंज्ञक कहलाता है। वह बीजसंज्ञक देवी परम तेजशील कही जाती है। वही बीज कभी क्रियाशक्ति और कभी ज्ञानशक्ति से समायोजित होकर देह में भ्रमणशील रहा करता है।
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