कुंडलिनी, कामबीज और सुषुम्ना - इन तीनों का पारस्परिक मिलन होना ही देवी त्रिपुरभैरवी नामसंज्ञक कहलाता है। वह बीजसंज्ञक देवी परम तेजशील कही जाती है। वही बीज कभी क्रियाशक्ति और कभी ज्ञानशक्ति से समायोजित होकर देह में भ्रमणशील रहा करता है।
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