यज्ञं चान्द्रायणं कृच्छ्रं तीर्थानि विविधानि च ।
दृश्यन्ते च इमे विघ्ना धर्मरूपेणसंस्थिताः ।।
यज्ञीय कर्मों का सम्पादन, पापक्षयार्थ कृच्छ्र चांद्रायण व्रत करना तथा अनेक तीर्थस्थानों में भ्रमणशील रहना - ये सभी कार्य धर्मरूप विघ्न की श्रेणी में आते है।
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