जिस स्थान में कुंडलिनी शक्ति अवस्थित होती है, उसी स्थान में बन्धूक पुष्प (गुलदुपहरिया) के सदृश रक्तवर्णीय आभायुक्त कामबीज की भी स्थिति होती है। वह आग में तपाये हुए स्वर्ण के समान चमकीला और प्रयुक्त अक्षर स्वरूप होता है।
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