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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 74
गुदाद्व्यङ्गुलतश्चोर्ध्व मेट्रैकाङ्गुलतस्त्वधः । एवं चास्ति समं कन्दं समता चतुरङ्गुलम् ।।
गुदाद्वार से दो अंगुल ऊपर की ओर तथा शिश्नमूल से एक अंगुल नीचे की ओर एक कंद चार अंगुल विस्तारवाला स्थित रहता है।
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