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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 71
आद्यभागं द्वयं नाड्यः प्रोक्तास्ताः सकला अपि । पोषयन्ति वपुर्वायुमापादतलमस्तकम् ।।
पूर्वकथित दो प्रकार के रस ही सम्पूर्ण नाड़ीरूप होते हैं। वे ही पैर से लेकर शिरोभाग तक शरीरस्थ वायु के पुष्टिकरण में निरत रहा करते हैं।
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