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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 70
सप्तधातुमयं पिण्डमेति पुष्णाति मध्यगः । याति विण्मूत्ररूपेण तृतीयः सप्तमो बहिः ।।
दूसरे रस से सप्तधातुओं से संयुक्त पिण्ड का परिपोषण हुआ करता है तथा तीसरा रस सप्तधातुओं (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र) से पृथक् मल-मूत्रादि के रूप में होता है।
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