जो योगसाधक शिर के पिछले भाग का ध्यान करता है वह कालजयी बन जाता है। इस प्रकार के सभी फल प्रूमध्य में दृष्टि जमाने के फलस्वरूप होते हैं, इस बात को हम पहले ही बतला चुके है।
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