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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 67
उत्तानशयने भूमौ सुप्त्वा ध्यायन्निरन्तरम् । सद्यः श्रमविनाशाय स्वयं योगी विचक्षणः ।।
यदि बुद्धिमान साधक भूतल पर पीठ के बल सीधा लेटकर लगातार ध्यान में निमग्न रहता है तो उसकी थकावट शीघ्र ही मिट जाती है अर्थात् वह स्फूर्ति का अनुभव करने लगता है।
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