इस रीति से जो साधक उठते-बैठते, चलते-फिरते, सोते-जागते तथा भोजनादि सभी कालों में सतत आत्म-चिन्तना में लगे रहते हैं, वे आकाशस्वरूप होकर परमात्मा में विलीन हो जाते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।