मानव के शिर और कपाल (खोपड़ी) में रुद्राक्ष-विवर की विद्यमानता रहती है। उस स्थान के चिन्तन से योगी में विद्युत्युंज के समान आत्मज्योति का प्रकाश उद्भासित होता है।
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