एतदभ्यासशीलो यः स योगी देवपूजितः ।
अणिमादिगुणान् लब्ध्वा विचरेन्द्भुवनत्रये ।।
इस प्रकार का अभ्यासी साधक देवताओं द्वारा सेवित हुआ करता है। ऐसा साधक अष्ट सिद्धियों को प्राप्त कर त्रिलोक में भ्रमण करने की भी शक्ति पा लेता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।