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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 53
यः करोति सदाभ्यासं तस्य सिद्धिर्न दूरतः । वायुसिद्धिभवेतस्य क्रमादेव न संशयः ।।
जो साधक इस विधि का अभ्यास प्रतिदिन नियमित रूप से करता रहता है उसे सभी प्रकार की सिद्धियाँ हस्तगत हो जाती है और उसे क्रमशः वायु की सिद्धि भी अपने-आप हो जाया करती हैं।
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