योगी को जनसमूह के सम्पर्क से रहित होकर किसी सुनसान स्थान में पद्मासन लगाकर बैठ जाना चाहिए। तत्पश्चात् उसे दोनों विज्ञान नाड़ियों अर्थात् इड़ा और पिंगला नाड़ियों का हाथ की अंगुलियों से प्राणवायु का अवरोधन करना चाहिए।
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