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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 46
इदानीं कथयिष्यामि मुक्तस्यानुभवं प्रिये । यज्ज्ञात्वा लभते मुक्तिं पापयुक्तोऽपिसाधकः ।।
शिवजी ने कहा - हे पार्वति! अब मैं तुमसे मोक्षानुभव का कथन कर रहा हूँ जिसके ज्ञानोपलब्धि से पापिष्ठ साधक भी मुक्तिलाभ प्राप्त कर लेता है।
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