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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 42
ध्वनौ तस्मिन्मनो दत्त्वा यदा तिष्ठति निर्भरः । तदा संजायते तस्य लयस्य मम वल्लभे ।।
ऐसी अवस्था आने पर मन में पूर्ण रूप से स्थिरता आ जाती है और वही मोक्ष का कारण बनता है। अतः हे देवी पार्वति! ऐसी साधना मेरे लिए परम प्रियकारक है।
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